साधुकी संगत पाईवो ।
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साधुकी संगत पाईवो । ज्याकी पुरन कमाई वो॥धृ०॥
पिया नामदेव और कबीरा । चौथी मिराबाई वो॥१॥
केवल कुवा नामक दासा । सेना जातका नाई वो॥२॥
धनाभगत रोहिदास चह्यारा । सजना जात कसाईवो॥३॥
त्रिलोचन घर रहत ब्रीतिया । कर्मा खिचडी खाईवो॥४॥
भिल्लणीके बोर सुदामाके चावल । रुची रुची भोग लगाईरे॥५॥
रंका बंका सूरदास भाई । बिदुरकी भाजी खाईरे॥६॥
धृव प्रल्हाद और बिभीषण । उनकी क्या भलाईवो॥७॥
मिरा कहे प्रभु गिरिधर नागर । ज्योतीमे ज्योती लगाईवो॥८॥
