नामी नारायण | होय भक
744.
नामी नारायण | होय भक्तांचे आधीन ॥१॥
न मागता भक्ति | नामापासी चारी मुक्ती ॥२॥
भुलो नये जाण | नाम वैकुंठी निशाण ॥३॥
नामा म्हणे ऐसे प्राणी | सम होती नारायणी ॥४॥
744.
नामी नारायण | होय भक्तांचे आधीन ॥१॥
न मागता भक्ति | नामापासी चारी मुक्ती ॥२॥
भुलो नये जाण | नाम वैकुंठी निशाण ॥३॥
नामा म्हणे ऐसे प्राणी | सम होती नारायणी ॥४॥