बड़े घर ताली लागी रे
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बड़े घर ताली लागी रे, म्हारा मन री उणारथ भागी रे॥
छालरिये म्हारो चित नही रे, डाबरिये कुण जाव ।
गंगा जमना सू काम नही रे, मैंतो जाय मिलू दरियाव॥
हाल्या मोल्यांसू काम नही रे, सीख नही सिरदार ।
कामदारासू काम नही रे, मै तो जाब करू दरबार॥
काच कथीरसू काम नही रे, लोहा चढ़े सिर भार ।
सोना रूपासू काम नही रे, म्हारे हीरांरो बौपार॥
भाग हमारो जागियो रे, भयो समंद सू सीर ।
अम्रित प्याला छांडिके, कुण पीवे कड़वो नीर॥
पीपाकू प्रभु परचो दियो रे, दीन्हा खजाना पूर ।
मिरा के प्रभु गिरघर नागर, धणी मिल्या छै हजूर॥
