जल कैशी भरु जमुना भय
88.
जल कैशी भरु जमुना भयेरी॥धृ०॥
खडी भरु तो कृष्ण दिखत है । बैठ भरु तो भीजे चुनडी॥१॥
मोर मुगुटअ पीतांबर शोभे । छुम छुम बाजत मुरली॥२॥
मिरा कहे प्रभु गिरिधर नागर । चणरकमलकी मै जेरी॥३॥
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जल कैशी भरु जमुना भयेरी॥धृ०॥
खडी भरु तो कृष्ण दिखत है । बैठ भरु तो भीजे चुनडी॥१॥
मोर मुगुटअ पीतांबर शोभे । छुम छुम बाजत मुरली॥२॥
मिरा कहे प्रभु गिरिधर नागर । चणरकमलकी मै जेरी॥३॥