हरि बिन कूण गती मेरी
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हरि बिन कूण गती मेरी ।
तुम मेरे प्रतिपाल कहिये मै रावरी चेरी॥
आदि अंत निज नाँव तेरो हीयामे फेरी ।
बेर बेर पुकार कहू प्रभु आरति है तेरी॥
यौ संसार बिकार सागर बीच मे घेरी ।
नाव फाटी प्रभु पाल बाँधो बूड़त है बेरी॥
बिरहणि पिवकी बाट जोवै राखल्यो नेरी ।
दासि मिरा राम रटत है मै सरण हू तेरी॥
