म्हारे घर,
30.
म्हारे घर,
म्हारे घर आवो जी गिरधर गोपाल ।
दरसन बिन मोहे चैन न आवै,
विरह भयो बेहाल ।
पंथ निहारूँ डगर बुहारूँ,
आवो नंदलाल ।
मिरा के प्रभु गिरधर नागर,
दरसन दीजै तत्काल ।
30.
म्हारे घर,
म्हारे घर आवो जी गिरधर गोपाल ।
दरसन बिन मोहे चैन न आवै,
विरह भयो बेहाल ।
पंथ निहारूँ डगर बुहारूँ,
आवो नंदलाल ।
मिरा के प्रभु गिरधर नागर,
दरसन दीजै तत्काल ।