माई री! मै तो लियो ग
57.
माई री! मै तो लियो गोविंदो मोल ।
कोई कहै छानै, कोई कहै छुपकै, लियो री बजंता ढोल ।
कोई कहै मुहंघो, कोई कहै सुहंगो, लियो री तराजू तोल ।
कोई कहै कारो, कोई कहै गोरो, लियो री अमोलिक मोल ।
या ही कू सब जाणत है, लियो री आँखी खोल ।
मिरा कू प्रभु दरसण दीज्यो, पूरब जनम को कोल ।
