बेद पुराण शास्त्र या
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बेद पुराण शास्त्र या अनंता । गीत कवित्व न गावोंगी । अखंड मंडल निरंकारमे नाहद बन बजावोंगी ॥१॥
बैरागी रामे गावोंगी शब्द अतीत अनाहद राता । अकलके घर जावोंगी ॥ध्रु०॥
ईडा पिंगला और सुखमना कोने बंद रहावोंगी । चंद सूरज दोई संकर राखू ब्रम्हजोत मिल जावोंगी ॥२॥
तीरथ देखन जलमे पैसो जिया जंत न संतावोंगी । अटसट तिरथ गुरू दिखाये । घटही भितर नावोंगी ॥३॥
पंच सहायी जनकी शोभा । भलो भलोना कहावोंगी । नामा कहे जित हरसु राता । सुन समाध समावोंगी ॥४॥
