छैल बिराणे लाख को हे
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छैल बिराणे लाख को हे अपणे काज न होइ ।
ताके संग सीधारता हे, भला न कहसी कोइ ।
वर हीणो आपणो भलो हे, कोढी कुष्टि कोइ ।
जाके संग सीधारता है, भला कहै सब लोइ ।
अबिनासी सू बालवा हे, जिपसू सांची प्रीत ।
मिरा कू प्रभु मिल्या हे, ऐहि भगति की रीत॥
