हारे जावो जावोरे जीव
211.
हारे जावो जावोरे जीवन जुठडा । हारे बात करता हमे दीठडां॥धृ०॥
सौ देखता वालो आळ करेछे । मारे मन छो मीठडारे॥१॥
वृंदावननी कुंजगलीनमे । कुब्जा संगे दीठ डारे॥२॥
चंदन पुष्पने माथे पटको । बली माथे घाल्याता पछिडारे॥३॥
मिरा कहे प्रभु गिरिधर नागर । मारे मनछो नीठडारे॥४॥
