तोरी सावरी सुरत नंदल
105.
तोरी सावरी सुरत नंदलालाजी॥धृ०॥
जमुनाके नीर तीर धेनु चरावत । कारी कामली वालाजी॥१॥
मोर मुगुट पितांबर शोभे । कुंडल झळकत लालाजी॥२॥
मिरा कहे प्रभु गिरिधर नागर । भक्तनके प्रतिपालाजी॥३॥
105.
तोरी सावरी सुरत नंदलालाजी॥धृ०॥
जमुनाके नीर तीर धेनु चरावत । कारी कामली वालाजी॥१॥
मोर मुगुट पितांबर शोभे । कुंडल झळकत लालाजी॥२॥
मिरा कहे प्रभु गिरिधर नागर । भक्तनके प्रतिपालाजी॥३॥