हरिसे कोई नही बडा ।
2.
हरिसे कोई नही बडा । दिवाने क्यो गफलतमे पडा ॥धृ॥
प्रल्हाद बेटा हरिसे लपटा । जभी खंभ कडकडा ॥१॥
गोपीचंद बचन सुनकर । महल मुलुख सब छोडा ॥२॥
हनुमानने सेवा कीन्ही । ले द्रोणागिरी उडा ॥३॥
पुंडलिकने सेवा कीन्ही । विठ्ठल बिटपर खडा ॥४॥
कहत कबीरा सुन भाई साधु । हरीचरण चित जडा ॥५॥
