स्याम मने चाकर राखो
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स्याम मने चाकर राखो जी
गिरधारी लाला चाकर राखो जी ।
चाकर रहसू बाग लगासू नित उठ दरसण पासू ।
बिंद्राबन की कुंजगलिन मे तेरी लीला गासूं॥
चाकरी मे दरसण पाऊ सुमिरण पाऊ खरची ।
भाव भगति जागीरी पाऊ तीनू बाता सरसी॥
मोर मुकुट पीतांबर सोहै गल बैजंती माला ।
बिंद्राबन मे धेनु चरावे मोहन मुरलीवाला॥
हरे हरे नित बाग लगाऊ बिच बिच राखू क्यारी ।
सांवरिया के दरसण पाऊ पहर कुसुम्मी सारी ।
जोगी आया जोग करणकू तप करणे संन्यासी ।
हरी भजनकू साधू आया बिंद्राबन के बासी॥
मिरा के प्रभु गहिर गंभीरा सदा रहो जी धीरा ।
आधी रात प्रभु दरसन दीन्हे प्रेमनदी के तीरा॥
