लेआईके कुंभ भराइके ।
४४.
लेआईके कुंभ भराइके । उदका ठाकुरके स्नान करो ॥१॥
ब्यालीस लख जी जलमे होते विठ्ठल भला कसे क्या जत्र जाव तत्र विठ्ठल भला महा आनंद करो सब केला ॥२॥
ले आइके फूल पेहराइके माला ठाकूरकी मै पूजा करू ॥३॥
पहले बास लई है भवरे विठल भला क्या करे ॥४॥
ले आइके दूध रंधाईके खीर ठाकुरको नैवेद करे ॥५॥
पहिले दूध बटार्यो बचरे विठल भला क्या करे ॥६॥
इसभे विठल उसभे विठल विठल बिन संसार नही । थान नंतर नामा परथवे पूर रह्यो तू सर्व मही ॥७॥
