संटा मरका जाय पुकारे
७८.
संटा मरका जाय पुकारे । पढे नही हमही पच हारे ॥१॥
राम कहे कर जाल बजारे चटीया सवे बगारे ॥२॥
राम नाम जप गोकरे । हिरदे हरजीको स्मरण धरे ॥३॥
वसुधा वसकीनी सब राजे विनती करे पट रानी । पुत प्रर्हादका कही नही माने तिन तो और ठानी ॥४॥
दुष्ट सभ भिल मंत्र उपाया करस है औद घनेरी । गिरतर जल ज्वाला भय राख्यो राजाराम माया फेरी ॥५॥
काड खड्ग काल अभय कोण्ये मोह बतावो जो तोह राखे । पीत पीतांबर त्रिभुवन धनी स्तंभ माह हर भाखे ॥६॥
हरनाकस जीन नखो बिदार्यो सुर नर किये सनाथा । काहे नामदेव हम नरहर ध्याते । राम अभयपद दाता ॥७॥
