राग हमीर
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राग हमीर
नहि एसो जनम बारंबार॥
का जानू कछु पुन्य प्रगटे मानुसा-अवतार ।
बढ़त छिन-छिन घटत पल-पल जात न लागे बार॥
बिरछके ज्यू पात टूटे, लगे नही पुनि डार ।
भौसागर अति जोर कहिये अनंत ऊंड़ी धार॥
रामनाम का बांध बेड़ा उतर परले पार ।
ज्ञान चोसर मंडा चोहटे सुरत पासा सार॥
साधु संत महंत ग्यानी करत चलत पुकार ।
दासि मिरा लाल गिरधर जीवणा दिन च्यार॥
