पंढरीनाथ विठाई बतावो
५५.
पंढरीनाथ विठाई बतावो मुजे पंढरीनाथ विठाई ॥ध्रु.॥
माय बापके सेवा करीये पुंडलीक भक्त सबाई । वैकुंठसे विष्णु लाये खडे करकर बतलाई ॥१॥
चंद्रभागा बालबंटपर कबिरा धुम चलाई । साधु संतकी हो गय़ी गर्दी भजन कुटाई खुब खाई ॥२॥
त्रिगुणामे रेनु वेनु बजावे सागरका जबाई । दही दुधकी हंडी फुटगई भरभर दुधया पाई ॥३॥
नामदेव देवके गुरू शिखावे खेंचरी मद्रा गाई । कृष्णजीकी बारबार गावे हरिनाम बढाई ॥४॥
