राग दरबारी कान्हरा
128.
राग दरबारी कान्हरा
पिय बिन सूनो छै जी म्हारो देस॥
ऐसो है कोई पिवकू मिलावै, तन मन करू सब पेस ।
तेरे कारण बन बन डोलूं, कर जोगण को भेस॥
अवधि बदीती अजहू न आए, पंडर हो गया केस ।
रा के प्रभु कब र मिलोगे, तज दियो नगर नरेस॥
128.
राग दरबारी कान्हरा
पिय बिन सूनो छै जी म्हारो देस॥
ऐसो है कोई पिवकू मिलावै, तन मन करू सब पेस ।
तेरे कारण बन बन डोलूं, कर जोगण को भेस॥
अवधि बदीती अजहू न आए, पंडर हो गया केस ।
रा के प्रभु कब र मिलोगे, तज दियो नगर नरेस॥