सखी आपनो दाम खोटो दो
232.
सखी आपनो दाम खोटो दोस काहा कुबज्याकू॥धृ०॥
कुबजा दासी कंस रायकी । दराय कोठोडो॥१॥
आपन जाय दुबारका छाय । कागद हू कोठोडो॥२॥
मिराके प्रभु गिरिधर नागर । कुबजा बडी हरी छोडो॥३॥
232.
सखी आपनो दाम खोटो दोस काहा कुबज्याकू॥धृ०॥
कुबजा दासी कंस रायकी । दराय कोठोडो॥१॥
आपन जाय दुबारका छाय । कागद हू कोठोडो॥२॥
मिराके प्रभु गिरिधर नागर । कुबजा बडी हरी छोडो॥३॥