वारकरी रोजनिशी

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दरस म्हारे बेगि दीज्

🙏 29. संत मिराबाई · ABH-076753 · अभंग क्र. ३००

300.
दरस म्हारे बेगि दीज्यो जी
ओ जी अन्तरजामी ओ राम खबर म्हारी बेगि लीज्यो जी

आप बिन मोहे कल ना पडत है जी
ओजी तडपत हू दिन रैन रैन मे नीर ढले है जी

गुण तो प्रभुजी मो मे एक नही छै जी
ओ जी अवगुण भरे है अनेक अवगुण म्हारा माफ करीज्यो जी

भगत बछल प्रभु बिड़द कहाये जी
ओ जी भगतन के प्रतिपाल सहाय आज म्हांरी बेगि करीज्यो जी

दासी मिरा की विनती छै जी
ओजी आदि अन्त की ओ लाज आज म्हारी राख लीज्यो जी

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