कायकू देह धरी भजन बि
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कायकू देह धरी भजन बिन कोयकु देह गर्भवासकी त्रास देखाई धरी वाकी पीठ बुरी॥ भ०॥१॥
कोल बचन करी बाहेर आयो अब तूम भुल परि॥ भ०॥२॥
नोबत नगारा बाजे । बघत बघाई कुंटूंब सब देख ठरी॥ भ०॥३॥
मिरा कहे प्रभु गिरिधर नागर । जननी भार मरी॥ भ०॥४॥
