मन माने जब तार प्रभु
179.
मन माने जब तार प्रभुजी॥धृ०॥
नदिया गहेरी नाव पुराणी । कैशी उतरु पार॥१॥
पोथी पुरान सब कुच देखे । अंत न लागे पार॥२॥
मीर कहे प्रभु गिरिधर नागर । नाम निरंतर सार॥३॥
179.
मन माने जब तार प्रभुजी॥धृ०॥
नदिया गहेरी नाव पुराणी । कैशी उतरु पार॥१॥
पोथी पुरान सब कुच देखे । अंत न लागे पार॥२॥
मीर कहे प्रभु गिरिधर नागर । नाम निरंतर सार॥३॥