जमुनाके तट धेनु चराव
376.
जमुनाके तट धेनु चरावत ।
गावत है गोवाल री ।
गीत प्रबंध हास्य विनोद ।
नाचत है श्रीहरि ॥१॥
माय री, देखत मै नंदलाल ।
कासे पीत बसन है झलाल ।
कानों मे कुंडलदेती ढाल ।
सिरपर मोरपिसा चंदलाल ॥२॥
अबीर गुलाल सबके माथा ।
हर सुवास पिनाये ।
जाई जुई चंपति कोमल ।
चंदन चंपक लाये ॥३॥
छंद धीमा धीमा सुनावत है ।
हरि बंध गयो मेरे प्राण ।
बहेणि कहे सब भूल गये ।
मेरा हरिसु लगा है मन ॥४॥
