पिहु की बोलि न बोल प
131.
पिहु की बोलि न बोल पपैय्या॥धृ०॥
तै खोलना मेरा जी डरत है । तनमन डावा डोल॥ पपैय्या०॥१॥
तोरे बिना मोकू पीर आवत है । जावरा करुंगी मै मोल॥ पपैय्या०॥२॥
मिरा के प्रभु गिरिधर नागर । कामनी करत कीलोल॥ पपैय्या०॥३॥
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पिहु की बोलि न बोल पपैय्या॥धृ०॥
तै खोलना मेरा जी डरत है । तनमन डावा डोल॥ पपैय्या०॥१॥
तोरे बिना मोकू पीर आवत है । जावरा करुंगी मै मोल॥ पपैय्या०॥२॥
मिरा के प्रभु गिरिधर नागर । कामनी करत कीलोल॥ पपैय्या०॥३॥