प्रभु, कबरे मिलोगे,
32.
प्रभु, कबरे मिलोगे,
प्रभु कबरे मिलोगे मोहे ।
दरसन बिन दुख पावत नैना,
विरह सतावत मोहे ।
दिन नहि चैन, रैन नहि निद्रा,
कौन कहूँ दुख जोहे ।
मिरा के प्रभु गिरधर नागर,
अब तो दर्शन दोहे ।
32.
प्रभु, कबरे मिलोगे,
प्रभु कबरे मिलोगे मोहे ।
दरसन बिन दुख पावत नैना,
विरह सतावत मोहे ।
दिन नहि चैन, रैन नहि निद्रा,
कौन कहूँ दुख जोहे ।
मिरा के प्रभु गिरधर नागर,
अब तो दर्शन दोहे ।