जमुनामो कैशी जाऊ मोर
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जमुनामो कैशी जाऊ मोरे सैया । बीच खडा तोरो लाल कन्हैया॥धृ०॥
ब्रिदाबनके मथुरा नगरी पाणी भरणा । कैशी जाऊ मोरे सैंया॥१॥
हातमो मोरे चूडा भरा है । कंगण लेहेरा देत मोरे सैया॥२॥
दधी मेरा खाया मटकी फोरी । अब कैशी बुरी बात बोलु मोरे सैया॥३॥
शिरपर घडा घडेपर झारी । पतली कमर लचकया सैया॥४॥
मिरा कहे प्रभु गिरिधर नागर । चरणकमल बलजाऊ मोरे सैया॥५॥
