प्रभु गिरधर नागर,
35.
प्रभु गिरधर नागर,
प्रभु गिरधर नागर, मोरे मन भायो ।
मोर मुकुट सिर ऊपर सोहै,
मुरली मधुर बजायो ।
चरण कमल की सेवा पाई,
जनम सफल करायो ।
मिरा के प्रभु गिरधर नागर,
अपनो दास बनायो ।
35.
प्रभु गिरधर नागर,
प्रभु गिरधर नागर, मोरे मन भायो ।
मोर मुकुट सिर ऊपर सोहै,
मुरली मधुर बजायो ।
चरण कमल की सेवा पाई,
जनम सफल करायो ।
मिरा के प्रभु गिरधर नागर,
अपनो दास बनायो ।