बंसीवारा आज्यो म्हार
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बंसीवारा आज्यो म्हारे देस । सांवरी सुरत वारी बेस॥
आऊं-आऊ कर गया जी कर गया कौल अनेक ।
गिणता-गिणता घस ग म्हारी आंगलिया री रेख॥
मै बैरागिण आदिकी जी थांरे म्हारे कदको सनेस ।
बिन पाणी बिन साबुण जी होय ग धोय सफेद॥
जोगण होय जंगल सब हेरू छोड़ा ना कुछ सैस ।
तेरी सुरत के कारणे जी म्हे धर लिया भगवा भेस॥
मोर-मुकुट पीताम्बर सोहै घूंघरवाला केस ।
मिरा के प्रभु गिरधर मिलिया दूनो बढ़ै सनेस॥
