अब तो निभाया सरेगी ब
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अब तो निभाया सरेगी बांह गहे की लाज ।
समरथ शरण तुम्हारी सैया सरब सुधारण काज॥
भवसागर संसार अपरबल जामे तुम हो जहाज ।
गिरधारा आधार जगत गुरु तुम बिन होय अकाज॥
जुग जुग भीर हरी भगतन की दीनी मोक्ष समाज ।
मिरा शरण गही चरणन की लाज रखो महाराज॥
