चालो मन गंगा जमुना त
72.
चालो मन गंगा जमुना तीर ।
गंगा जमुना निरमल पाणी सीतल होत सरीर ।
बंसी बजावत गावत कान्हो, संग लियो बलबीर॥
मोर मुगट पीताम्बर सोहे कुण्डल झलकत हीर ।
मिराके प्रभु गिरधर नागर चरण कंवल पर सीर॥
72.
चालो मन गंगा जमुना तीर ।
गंगा जमुना निरमल पाणी सीतल होत सरीर ।
बंसी बजावत गावत कान्हो, संग लियो बलबीर॥
मोर मुगट पीताम्बर सोहे कुण्डल झलकत हीर ।
मिराके प्रभु गिरधर नागर चरण कंवल पर सीर॥