हे री मै तो प्रेम दि
109.
हे री मै तो प्रेम दिवानी, मेरो दरद न जाणै कोय ।
सूली ऊपर सेज हमारी सोवण किस विध होय ।
गगन मंडल पर सेज पिया की किस विध मिलणा होय ।
घायलकी गत घायल जाणै जो कोई घायल होय ।
जौहरि की गति जौहरी जाणै दूजा न जाणै कोय ।
दरद की मारी बन-बन डोलूँ बैद मिल्या नहि कोय ।
मिराँ की प्रभु पीर मिटे जब बैद साँवलिया होय ।
