हरिसे कोई नही बडा ।
18.
हरिसे कोई नही बडा । दिवाने क्यो गफलतमे पडा ॥धृ॥
प्रल्हाद बेटा हरिसे पलटा । जबी खांब कडकडा ॥१॥
गोपीचंदा बचन सुनकर । महाल मुलूख सब छोडा ॥२॥
हनुमानने सेवा कीनी । ले द्रोणागिरी उडा ॥३॥
पुंडलिकने सेवा कीनी । विठ्ठल विटपर खडा ॥४॥
कहत कबीरा सुन भाई साधु । हरीचरण चित जडा ॥५॥
