पावन प्रेम रामचरन कम
2.
पावन प्रेम रामचरन कमल जनम लाहु परम ।
रामनाम लेत होत, सुलभ सकळ धरम ।
जोग मख बिबेक विरति, बेदबिहित करम ।
करिवे कहा कटु कठोर, सुनत मधुर नरम ॥
तुलसी सुनि जानि बुझी, भूलही जनी भरम ।
तेहि प्रभुको तु सरन होहि, जेहि सबकी सरम ॥
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पावन प्रेम रामचरन कमल जनम लाहु परम ।
रामनाम लेत होत, सुलभ सकळ धरम ।
जोग मख बिबेक विरति, बेदबिहित करम ।
करिवे कहा कटु कठोर, सुनत मधुर नरम ॥
तुलसी सुनि जानि बुझी, भूलही जनी भरम ।
तेहि प्रभुको तु सरन होहि, जेहि सबकी सरम ॥