तोरी सावरी सुरत नंदल
262.
तोरी सावरी सुरत नंदलालाजी॥धृ०॥
जमुनाके नीर तीर धेनु चरावत । कारी कामली वालाजी॥१॥
मोर मुगुट पितांबर शोभे । कुंडल झळकत लालाजी॥२॥
मिरा कहे प्रभु गिरिधर नागर । भक्तनके प्रतिपालाजी॥३॥
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तोरी सावरी सुरत नंदलालाजी॥धृ०॥
जमुनाके नीर तीर धेनु चरावत । कारी कामली वालाजी॥१॥
मोर मुगुट पितांबर शोभे । कुंडल झळकत लालाजी॥२॥
मिरा कहे प्रभु गिरिधर नागर । भक्तनके प्रतिपालाजी॥३॥