हमरे चीर दे बनवारी॥ध
239.
हमरे चीर दे बनवारी॥धृ०॥
लेकर चीर कदंब पर बैठे । हम जलमा नंगी उघारी॥१॥
तुमारो चीर तो तब नही । देउंगा हो जा जलजे न्यारी॥२॥
ऐसी प्रभुजी क्यौ करनी । तुम पुरुख हम नारी॥३॥
मिराके प्रभु गिरिधर नागर । तुम जीते हम हारी॥४॥
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हमरे चीर दे बनवारी॥धृ०॥
लेकर चीर कदंब पर बैठे । हम जलमा नंगी उघारी॥१॥
तुमारो चीर तो तब नही । देउंगा हो जा जलजे न्यारी॥२॥
ऐसी प्रभुजी क्यौ करनी । तुम पुरुख हम नारी॥३॥
मिराके प्रभु गिरिधर नागर । तुम जीते हम हारी॥४॥