अच्छे मीठे फल चाख चा
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अच्छे मीठे फल चाख चाख, बेर लाई भीलणी ।
ऎसी कहा अचारवती, रूप नही एक रती ।
नीचे कुल ओछी जात, अति ही कुचीलणी ।
जूठे फल लीन्हे राम, प्रेम की प्रतीत त्राण ।
उँच नीच जाने नहीं, रस की रसीलणी ।
ऎसी कहा वेद पढी, छिन मे विमाण चढी ।
हरि जू सू बाँध्यो हेत, बैकुण्ठ मे झूलणी ।
दास मिरा तरै सोई, ऎसी प्रीति करै जोइ ।
पतित पावन प्रभु, गोकुल अहीरणी ।
