हरि गुन गावत नाचूंगी
17.
हरि गुन गावत नाचूंगी॥धृ०॥
आपने मंदिरमो बैठ बैठकर । गीता भागवत बाचूंगी॥१॥
ग्यान ध्यानकी गठरी बांधकर । हरीहर संग मै लागूंगी॥२॥
मिराके प्रभु गिरिधर नागर । सदा प्रेमरस चाखुंगी॥३॥
17.
हरि गुन गावत नाचूंगी॥धृ०॥
आपने मंदिरमो बैठ बैठकर । गीता भागवत बाचूंगी॥१॥
ग्यान ध्यानकी गठरी बांधकर । हरीहर संग मै लागूंगी॥२॥
मिराके प्रभु गिरिधर नागर । सदा प्रेमरस चाखुंगी॥३॥