मै तो तेरे भजन भरोसे
290.
मै तो तेरे भजन भरोसे अबिनासी॥ मैतो०॥धृ०॥
तीरथ बरतते कछु नही कीनो । बन फिरे है उदासी॥ मैंतो० तेरे॥१॥
जंतर मंतर कछु नही जानू । बेद पठो नही कासी॥ मैतो० तेरे॥२॥
मिराके प्रभु गिरिधर नागर । भई चरणकी दासी॥ मैतो० तेरे॥३॥
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मै तो तेरे भजन भरोसे अबिनासी॥ मैतो०॥धृ०॥
तीरथ बरतते कछु नही कीनो । बन फिरे है उदासी॥ मैंतो० तेरे॥१॥
जंतर मंतर कछु नही जानू । बेद पठो नही कासी॥ मैतो० तेरे॥२॥
मिराके प्रभु गिरिधर नागर । भई चरणकी दासी॥ मैतो० तेरे॥३॥